Manglik Dosha & Bhaat Puja - कब और क्यों की जाती है ये विशेष पूजा?Punjabkesari TV
57 minutes ago ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब किसी व्यक्ति की कुंडली में लग्न, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में मंगल ग्रह स्थित होता है, तो उसे मांगलिक योग कहा जाता है। ऐसे में विवाह से पहले या बाद में भात पूजा करने की सलाह दी जाती है, जिससे मंगल की उग्रता शांत हो सके और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहे।
भात पूजा में चावल से शिवलिंग स्वरूप मंगल देव की पूजा की जाती है। पूजा की शुरुआत भगवान गणेश और माता पार्वती के पूजन से होती है, इसके बाद नवग्रह पूजन, कलश स्थापना और भगवान शिव का पंचामृत अभिषेक किया जाता है। अंत में मंगल शांति मंत्र और आरती के साथ पूजा संपन्न होती है।
पौराणिक कथा के अनुसार, अंधकासुर के वध के दौरान भगवान शिव के पसीने की बूंदों से मंगल ग्रह की उत्पत्ति हुई। मंगल की उग्रता को शांत करने के लिए देवताओं ने दही और भात अर्पित किया, जिससे उनकी ऊर्जा संतुलित हुई। इसी परंपरा के आधार पर मांगलिक जातकों को भात पूजा करने की सलाह दी जाती है।